भरत तिवारी प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग, डॉ. राज शेखावत ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की उठाई आवाज
By The Ishraj Times News Desk | 16 June 2026
नई दिल्ली
भरत तिवारी प्रकरण को लेकर देशभर में चर्चा के बीच क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व बीएसएफ अधिकारी डॉ. राज शेखावत ने मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि इस मामले में किसी प्रकार की अनियमितता या कानून के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
जारी बयान में डॉ. शेखावत ने कहा कि किसी भी नागरिक को निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया से वंचित नहीं किया जा सकता। उन्होंने इस मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून का शासन सर्वोपरि होना चाहिए और हर मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या विशेष जांच दल (SIT) से कराई जाए ताकि सभी तथ्यों की निष्पक्ष समीक्षा हो सके। साथ ही उन्होंने कहा कि जांच से जुड़े सभी डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाना चाहिए ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद न हो।
डॉ. शेखावत ने यह भी कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और मामले की पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने राष्ट्रीय और राज्य मानवाधिकार संस्थाओं से भी मामले का संज्ञान लेने और आवश्यक कार्रवाई करने की अपील की। उनके अनुसार, ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच न केवल पीड़ित परिवार के लिए बल्कि न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण होती है।
इस बीच भरत तिवारी प्रकरण को लेकर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों की ओर से भी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। मामले की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग लगातार उठ रही है। फिलहाल संबंधित एजेंसियों की ओर से मामले में की जा रही कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।
डॉ. शेखावत ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से सच्चाई सामने आनी चाहिए और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए। उन्होंने शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से न्याय की मांग करने का आह्वान भी किया।
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