UGC-2026 पर बढ़ा विवाद: 8 मार्च को रामलीला मैदान में ‘UGC रोलबैक को लेकर राज शेखावत ने दी बड़े आंदोलन’ की चेतावनी
Published by : Raj Kumar – UGC एक्ट को लेकर जारी विवाद के बीच “सवर्ण समाज समन्वय समिति” से जुड़े 40 से अधिक संगठनों ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि यदि प्रस्तावित कानून वापस नहीं लिया गया तो 8 मार्च 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में “UGC रोलबैक आंदोलन” शुरू किया जाएगा।
यह घोषणा समिति के प्रमुख Swami Anand Swaroop Maharaj ने पंडित मदन मोहन मालवीय स्मृति भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में की। उन्होंने बताया कि आंदोलन की औपचारिक शुरुआत 1 फरवरी को प्रस्तावित देशव्यापी बंद के समर्थन से की जाएगी।
📢 क्या कहा स्वामी आनंद स्वरूप महाराज ने?
स्वामी आनंद स्वरूप महाराज ने कहा कि UGC-2026 एक्ट समाज के लिए “विभाजनकारी” और “असंवैधानिक भावना के विपरीत” है। उन्होंने दावा किया कि यद्यपि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस कानून पर अस्थायी रोक लगाई है, लेकिन अंतिम समाधान संसद के माध्यम से ही संभव है, क्योंकि कानून संसद द्वारा पारित किया गया था।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार 8 मार्च से पहले इस कानून को वापस नहीं लेती, तो रामलीला मैदान में होने वाला प्रदर्शन “ऐतिहासिक” होगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को समाज को बांटने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
🏛 प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई संगठनों की मौजूदगी
इस प्रेस वार्ता में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से:
राज सिंह शेखावत (क्षत्रिय करणी सेना)
प्रशांत सिंह (सनातन करणी सेना)
संजीव राजपूत (वकील, सुप्रीम कोर्ट)
संजीव सिंह (अखिल भारतीय सवर्ण मोर्चा)
विजय कौशिक (हिंदू महासभा)
अनूप श्रीवास्तव (कायस्थ महासभा)
ब्रिगेडियर अनिल श्रीवास्तव
पूर्व हाई कोर्ट जस्टिस सुधीर सक्सेना
सीनियर एडवोकेट डीपी श्रीवास्तव
अनिल अग्रवाल (अग्रवाल महासभा)
श्रीधर साल्वे (भीम सेना)
कुलदीप पांडे (जनसंघ)
पंकज धवारिया (RSP)
सहित अन्य संगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
🔥 अन्य नेताओं के बयान
भीम सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष Shridhar Salve ने कहा कि उनका संगठन सवर्ण समाज समन्वय समिति के साथ खड़ा है और वे अपने समुदाय को किसी भी कीमत पर बंटने नहीं देंगे।
करणी सेना के राज सिंह शेखावत ने इस कानून को “ड्रेकोनियन” बताते हुए कहा कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार इसे रद्द नहीं करती। उन्होंने राजनीतिक परिणामों की भी चेतावनी दी।
📅 1 फरवरी से जागरूकता अभियान
समिति ने घोषणा की है कि 1 फरवरी से देशव्यापी जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि वे संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग सरकार तक पहुंचाएंगे।
🏛 सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से इस चेतावनी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। शिक्षा नीति से जुड़े मामलों में सरकार आमतौर पर समीक्षा और परामर्श प्रक्रिया अपनाती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह मुद्दा व्यापक जनसमर्थन प्राप्त करता है, तो आने वाले दिनों में यह राष्ट्रीय बहस का विषय बन सकता है।
✍️ निष्कर्ष
UGC-2026 को लेकर बढ़ता विरोध 8 मार्च को रामलीला मैदान में प्रस्तावित महाआंदोलन के रूप में बड़ा रूप ले सकता है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार इस चेतावनी और मांगों पर क्या कदम उठाती है।
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